उद्देश्य

अतीत भारत का इतिहास अत्यन्त गौरवशाली एवं समृद्ध है। धर्म, शास्त्र, वेद, पुराण की मूल सूक्तियों अन्य धर्मों का जन्म हुआ। हमारी संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी है। कभी सम्पूर्ण विश्व में सनातन धर्म सर्वोपरि था, किन्तु वर्तमान में भारतीय समाज अपने पथ के उद्देश्य से विमुख हो गया, तमाम कुरीतियों का रोग लग गया। अंतहीन अंधेरी सुरंग से लोग भाग रहे हैं। कोई पथ प्रदर्शक नहीं रहा। ब्राह्मण सदैव से समाज में सर्वोच्च रहा, किन्तु आज ब्राहम्ण का भी पतन हो गया। मांस, मदिरा के सेवन, असत्य बोल से अनेकों दुर्गुण ब्राहम्णों में भी प्रवेश कर गए। परिणाम आपके सामने है।

ऐसी विषम परिस्थितियों में ब्राहम्ण जो को समाज का आइना है अनेकों बुराइयों से ग्रसित होने लगा। हमारी संस्कृति, परम्परा, धर्म, आध्यात्म का अपने सिद्वांतों, आदर्शों , मापदण्डों, से भटकाव हुआ, भौतिकताकी दौड़ में हम भी शामिल हो गए। जब पथ प्रदर्शक ही पथ भ्रष्ट हो गया तो समाज कहां जाएगा। आज ब्राहम्ण की स्थिति बद से बदतर है। हम अपने मूल से भटक गए। आपस झगड़ों, अहम ने हमें और नीचे धकेल दिया। आज समाज का हर वर्ग ब्राहम्णों से द्वैष रखता है। हम आपस में संगठित नही है। ऐसे में हमारा अस्तित्व ही समाप्त होने की कगार पर है।

हमें सोचना होगा गंभीरता से विचार करना होगा, एकजुट होना होगा, पुर्नविचार हेतु, सम्मान, प्रतिष्ठा हेतु बलिदान करना होगा, भौतिकता से परे आपसी द्वंद्व से दूर अहम को त्याग कर भारतीय संस्कृति, परम्परा को अशुद्व रखने हेतु संकल्प लेना होगा, ताकि हम बने हमारा अस्तित्व बना रहे। हमारी सांस्कृतिक विरासत बनी रहे, हमारा मान प्रतिष्ठा बनी रही।

अध्यक्षीय सन्देश

सुहृदय आत्मीयजनो,

जय श्री भगवान परशुराम !

उल्लास का विषय है की विगत वर्षों से किये जा रहे प्रयासों से भगवान परशुराम महासभा बीज से वृक्ष की ओर परिवर्तित होती प्रतीत हो रही है | यह आप सभी के अथक प्रयासों का परिणाम है| पूर्ण विश्वास है की भगवान परशुराम महासभा आने वाले समय में वटवृक्ष जैसा विशाल संगठन हो सकेगा| इस वेबसाइट के माध्यम से महासभा ने एक विशाल संगठन खड़ा करने का संकल्प लिया है|

किसी की सहायता हेतु हम पूर्ण संकल्पित है| मानव जीवन में पवित्र 16 संस्कार संपन्न किये जाते है जिसको मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक धारण करता है किन्तु आधुनिक युग में वह इन्हें भूल चूका है| कैसे व्यक्ति के चरित्र को उज्जवल बनाया जाये जिससे वह देश के लिए, अपने समाज के लिए अर्जुन बने उनकी रक्षा करें,अपने धर्म की रक्षा करे|

मै पुन: आप सभी को बधाई व धन्यवाद अर्पित करता हूँ| आप सब की मेहनत का परिणाम है की आज हम सब अपने समाज की रक्षा के लिए संकल्पित है|

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